जिन लक्षणों की जाँच ज़रूरी हो सकती है
- पेशाब की धार कमज़ोर, पतली या रुक-रुक कर आना
- धार शुरू होने से पहले इंतज़ार करना पड़ना
- रात में दो या उससे अधिक बार पेशाब के लिए उठना
- बार-बार पेशाब आना, या अचानक तेज़ हाजत
- ऐसा लगना कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ
- पेशाब के अंत में बूँद-बूँद टपकना
जाँच कैसे होती है
जाँच की शुरुआत आपके लक्षणों, चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षण से होती है। ज़रूरत के अनुसार लक्षण स्कोर (IPSS), पेशाब की जाँच, प्रोस्टेट का आकार और पेशाब करने के बाद बचा मूत्र देखने के लिए सोनोग्राफी, तथा पेशाब की धार मापने के लिए यूरोफ़्लोमेट्री की जा सकती है। उचित होने पर PSA रक्त जाँच पर चर्चा की जाती है। प्रोस्टेट बढ़ने, सूजन या कैंसर से PSA बढ़ सकता है; केवल PSA से कैंसर का निदान या कैंसर न होने की पुष्टि नहीं हो सकती। आगे की जाँच आपके परिणामों और जोखिम पर निर्भर करती है।
इलाज कैसे होता है
हल्के लक्षणों में निगरानी और पानी तथा शाम की आदतों पर सलाह पर्याप्त हो सकती है। दवाएँ प्रोस्टेट को ढीला करने या उसका आकार घटाने में मदद कर सकती हैं। लक्षण परेशान करते रहें या पेशाब रुकने, बार-बार संक्रमण अथवा किडनी की परेशानी जैसी जटिलताएँ हों, तो सर्जरी पर विचार किया जाता है। पेशाब के रास्ते दूरबीन से सर्जरी एक विकल्प है। उचित तरीका आपकी जाँच, प्रोस्टेट के आकार और समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।


