जिन लक्षणों की जाँच ज़रूरी हो सकती है
- खाँसने, छींकने, हँसने या वज़न उठाने पर रिसाव — स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस
- अचानक तेज़ हाजत और शौचालय तक पहुँचने से पहले रिसाव — अर्ज इनकॉन्टिनेंस
- लगातार बूँद-बूँद टपकना
- रात में या बिस्तर में पेशाब निकल जाना
- पैड की ज़रूरत पड़ना, या शौचालय की उपलब्धता देखकर बाहर जाना
जाँच कैसे होती है
जाँच में ध्यान से लिया गया इतिहास और ब्लैडर डायरी, शारीरिक परीक्षण, संक्रमण है या नहीं, यह जानने के लिए पेशाब की जाँच, पेशाब के बाद बचे मूत्र के मापन सहित सोनोग्राफी, और चुनिंदा मामलों में यूरोडायनामिक परीक्षण शामिल होते हैं, जिससे यह ठीक-ठीक पता चलता है कि मूत्राशय और उसका निकास कैसा व्यवहार कर रहे हैं।
इलाज कैसे होता है
इलाज पेशाब के रिसाव के प्रकार और कारण पर निर्भर करता है। पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियों का व्यायाम, मूत्राशय का प्रशिक्षण और तरल पीने की आदतों में उचित बदलाव अक्सर मदद करते हैं। कुछ मरीज़ों में दवा या प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है। यदि रिसाव पेशाब रुकने, रुकावट, संक्रमण या नसों की समस्या से जुड़ा है, तो उस कारण का विशेष इलाज आवश्यक है। निदान और आपकी पसंद के अनुसार उचित होने पर सर्जरी पर चर्चा की जा सकती है।



