
जानें कि क्या हो सकता है
- यूरेटेरोस्कोपी के बाद हल्की जलन, तेज़ हाजत, बार-बार पेशाब या थोड़ा खून आ सकता है। स्टेंट से ख़ासकर पेशाब करते समय मूत्राशय या बगल में तकलीफ़ हो सकती है। लक्षण बने रहें या बढ़ें तो टीम को बताएँ।
- इलाज करने वाली टीम से तय दर्द की और दूसरी दवाएँ ही लें। एंटीबायोटिक दी गई हो तो डॉक्टर द्वारा योजना बदलने तक पूरा निर्धारित कोर्स लें।
रिकवरी और स्टेंट की देखभाल करें
- डिस्चार्ज की योजना और किडनी या हृदय से जुड़ी तरल सीमा के अनुसार पिएँ। चलने, काम, व्यायाम, यौन संबंध और वाहन चलाने के बारे में टीम की सलाह मानें; एनेस्थीसिया के बाद की पाबंदियाँ भी मानें।
- धागा दिखता हो तो उसे खिंचने से बचाएँ। स्टेंट ख़ुद तभी निकालें जब टीम ने विशेष निर्देश देकर तरीक़ा सिखाया हो। वह खिसक जाए या बाहर आ जाए तो टीम से संपर्क करें।
निकालने और आगे की जाँच की योजना मानें
- हॉस्पिटल से जाने से पहले जान लें कि स्टेंट लगा है या नहीं, कैसे निकलेगा या बदलेगा और किस तारीख़ को। अपॉइंटमेंट की सूचना न आए तो यूरोलॉजी टीम से संपर्क करें; यह न मानें कि स्टेंट अनिश्चित समय तक रह सकता है।
- बची पथरी, पथरी की जाँच और बचाव की सलाह के लिए दोबारा दिखाने आएँ। अच्छा महसूस होने से यह साबित नहीं होता कि सभी पथरियाँ निकल गई हैं या स्टेंट निकाल दिया गया है।
